इस देश में सन 2001 की जनगणना के अनुसार आदिवासियों की आबादी 8 करोड़ 44 लाख था,इसमें से लगभग ढाई करोड़ लोगों को विस्थापित कर दिया गया ।संविधान की पाँचवी अनुसूची इसलिये काफी महत्वपूर्ण है क्यूंकि इस देश में आज 2021 की जनगणना के अनुसार लगभग 10 करोड़ आदिवासी पाँचवी अनुसूची के क्षेत्र मे निवास करते हैं तथा 3 करोड़ लोग छटवीं अनुसूची क्षेत्र में निवास करते हैं । संविधान की धारा 330 एवं 332 धारा के तहत अनुसूचित जनजाति,जाति के लोगों को राजनैतिक आरक्षण का प्रावधान किया गया है ।
Dr.baba sahab ambedkar ने Schedulde caste और OBC ( Other backward Classes) को केवल शिक्षा और नौकरी का आरक्षण दिया लेकिन आदिवासियों को शिक्षा और नौकरी मे आरक्षण के साथ साथ डदो महत्वपूर्ण अधिकार दिये, That is called right of self governance & right of Ownership .
1. Self Governance ( स्वयं शासक का अधिकार )
2. Right of Owerneship ( मालिक हक्क की अधिकार )
मालिक हक्क की अधिकार यानी आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को नहीं देना चाहिए, आदिवासियों की जमीन में अगर कोई मिनरल्स है,माइन्स है,खदान है, अगर उसको भी Govt. (सरकार) को देना है तो बगैर आदिवासियोँ के पंचायत के, बगैर आदिवासी के ग्रामसभा के पर्मिशन के, बगैर वो मायनिन्ग का परमिशन किसी भी नान- आदीवासी को नहीं दिया जा सकता,ये भी मालिक हक्क की अधिकार है ।
स्वयं शासक का अधिकार है कि हमारा कल्चर कैसा होना चाहिए?
आपस में अगर कम्युनिटी से डिसपुट होता है, ट्राईब- ट्राईब में तो उसके लिए है हाई कोर्ट में जाने की जरुरत नहीं है । "ट्राईबल पंचायत " उसको सुलझा सकती है ।अपने अधिकार कस्टम का ।बजेट के आलोकेशन में,जो ट्राईब्ज को प्लैन आता है उसका खर्चा कौन से कामों के लिए होना चाहिए ।ये सारी निर्णय लेने के लिए स्वयं शासन के अधिकार अंबेडकर जी ने पाँचवी अनुसूची में आदिवासियोँ को दिये।
मालिक हक्क की अधिकार छट्वें सूची में इससे आगे आता है । कैसे आगे आता है ?
छट्वें सूची में ये और आगे जाता है । छट्वें सूची में मान लिजिये अगर सरकार को आदिवासियोँ के जमीन से अगर सोना निकालना हो,या युरेनियम निकालना हो तो छटवी सूची ये कहती हैं कि,सरकार भी वह मिनरल्स नहीं निकाल सकती और उसको वो मिनरल्स निकालना है , खनिज संपदा को निकालना है तो फिर सरकार को आदिवासियों की DISTRICT AUTONOMOUS COUNSIL को ROYALTY ( रॉयल्टी ) देनी होगी ।
✊✊✊ जय भीम,जय आदिवासी ✊✊✊
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